अधूरे ख्वाब और अंतिम अलविदा

 मुझे शौक नही किसी के जैसा बनने का, मै जो हूँ वही अंत तक रहना चाहुंगा ...

जब होगा आभास अंतिम पड़ाव का, तो जाने से पहले कुछ बात कह के जाऊंगा...

उठाना मेरी इन्ही शब्दो को मेरी डायरी मे, मै बहुत सी चीजे लिख के जाऊंगा ....

मै बढा कुछ सपनो के साथ था यहां तक, पर कुछ अधुरे ख्वाब भी मै अपने साथ ले जाऊंगा....

मेरे हर शब्द का ज़िकर करोगे तुम, मै तुम सबसे किया हर वचन निभाऊंगा ....

मुझपे कब कहां कितना खर्च करना है, ये सब भी बता के जाऊंगा...

मुझे मार तो बहुत से लोगो ने पहले दिया था, बस अंतिम अलविदा कहने के लिये आऊंगा ....

ये अच्छे का चोला पहने हुये लोग, बुरो से बत्तर निकले, मै इनके लिये गलत था, गलत हूँ और अंत तक गलत बन के जाऊंगा ...

मुझे कोई दुख नही मुझे ज़िससे जो भी मिला, बस दुख ये रहेगा कि जो हकदार नही था, उसे अकेला कर जाऊंगा ....

मुझे जनम मिले तो यही मां यही भाई यही पिता यही बहन हो, और जीवन संगनी सदा तुझे ही चाहुंगा ....

मुझे मेरे पिता का हिस्सा मिला संघर्ष का, कोई खेद नही होगा अगर अंत मे भी ऐसे ही जाऊंगा ...

बस इतना ही कहना है अंत मे, मै लाख बुरा सही, पर तुम जैसा अच्छा बनना कभी नही चाहुंगा ....

मै दौडूँगा कभी अस्पताल की सीढ़ीय़ां ये भूल जाओ तुम, मै वहां मेरे आखिरी मे ही आऊंगा ...

मै लम्बी ज़िन्दगी जीने आया ही नही था, बस कुछ अधूरा पूरा कर दूँ, फिर स्वयं शांत हो जाऊंगा .... 🖊- Aashu Chandra

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