अनपढ़ कुछ पढ़े लिखो से बेहतर हैं...

 🖊 अनपढ़ कुछ पढ़े लिखो से बेहतर हैं....

                       by - Aashu Chandra 🖊 

याद करता हुं कि कुछ लोग थे मेरे आस पास जो मेरे कपड़ो का मजाक उड़ाय़ा करते थे....

मै आया था दूर गांव से शहर पढ़ने के लिए, वो मुझे देशी गवार बताया करते थे... 

मै चुप चाप निकलता था दूर से, कही देख लिया तो सबके सामने नीचा दिखाया करते थे...

मै भी शौक रहीशी के पाल तो लेता, पर पापा बहुत मेहनत से और थोड़ा कम पैसे कमाया करते थे...

हम नही खरीद पाये बड़े बड़े खिलोने, हम थोड़े थोड़े पैसे अपनी जरूरतो पर जूटाय़ा करते थे....

हम आते थे जब घर से दूर तो हंसी भुल जाते थे, क्युकी हम हमेशा साथ बैठ के खाना खाय़ा करते थे....

ये अंजान शहर, ये किराये का कमरा, बचपन मे हम कितना मुस्कुराया करते थे..

उमर जैसे जैसे निकल रही है, महसूस हो रहा है, वो स्कूल का बस्ता नही, सपने पीठ पर ले जाया करते थे...

आज जब ये शहर एक उम्मीद ले के आये तो पता चला, इंसान कितना खाली है, 

वो गांव के ही सही पर पहले के लोग तो हमेशा एक दुसरे के साथ हांथ बंटाया करते थे...

आज आधुनिकता ने बदल दिया लोगो की सोच को, पहले ऐक दुसरे से मिल के सफर आसान बनाया करते थे....

आज शब्द भी होते हैं तो समझ नही आता कहे किससे, पहले किस्से सुनने के लिए लोग आ जाया करते थे...

अब तो घर मे ही TV Mobile मे कैद हैं बच्चे, हम तो बाहर दोस्तो संग खेलने के चक्कर मे मार भी खाया करते थे..

अब बनावटी हो गयी हैं चीजे सारी, वो माहौल कैसा भी हो, पर हम जो थे वही दिखाया करते थे....

ये पिज्जा बर्गर तो आज जाना हमने, वरना हम तो अचार पराठे मे भी खुश हो जाया करते थे...

घर मे भले ही अच्छा खाना क्यू ना बना हो, पर कभी कभी नमक रोटी भी खाया करते थे...

आज ज़िसे देखो सब समेटने मे लगा है, कल तक काम कम मे भी चलाया करते थे....

आज बच्चे की ज़िद है, की पहले बिजली पंखा और सब अच्छा अच्छा मिल जाये तो ही पढ़ पायेंगे ...

पहले तो हम पढ़ने के लिए, पैदल य़ा सायकिल से कोशों दूर जाया करते थे....

पहले माँ बाप बच्चो को दूर भेजने से डरते थे, कोई गलत रास्ता ना पकड़ ले इसिलिये 100 बार समझाया करते थे...

वो गलती माफ भी करते थे, तो कभी कभी कड़क हो कर अनुशासन भी सिखाया करते थे...

ऐक पीढी धीरे धीरे जाने वाली है दोस्त, इसिलिये मन विचलित है, 

वो अनपढ़ ही सही, पर ज़िन्दगी की खामिया बहुत बारीकी से बताया करते थे...

कल सिर्फ पढ़े लिखे लोग ही रह जायेंगे फिर कोई नही कहेगा पहले के लोग ज़िन्दगी के तजूर्बे बताया करते थे...

🙏 राधे राधे 🙏

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