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संघर्ष - Struggle

 🖊  संघर्ष  - by Aashu Chandra  🖊  कई  बार  ऐसा देखा  है, जो बहुत सफर  कर के शांत  बैठा  होता  है ना, असल  मे वही सच्चा होता है... वरना  जो थोड़ा बहुत भी सफर कर लेते , तो अपनी चीजे  हर जगह गा गा के बताते  हैं... कई  बार  तो संघर्ष उनके मुंह  से सुनने को मिल  जाता है, जो सफर था ही नही, बस हा एक  चीज जो अपने लिए हासिल  की... असली  संघर्ष  और सफर  वो होता है, ज़िसमे आपका  कुछ होता ही नही...आप अपनो के लिए संघर्ष  करते हो... और ज़िसमे  अंत  मे कुछ  मिलता  भी  नही...पर आप  उस सफर  पर चलते रहते हो,  क्युकी  आपको मालुम है की आपने ना होने से कितनी चीजे घर की रुक जायेंगी ... ये संघर्ष  कोई गाथा  नही, ज़िसे जगह  जगह तुम गाओगे.. ये तो जीवन  का हिस्सा  है, ना चाह  कर भी निभाओगे .. जो भी मिला ये भी तुम्हारा नही, ये उस क्षण  की मीठी  भुल  है, अंत  ही तुम्हारा  जीवन है, अं...

अनपढ़ कुछ पढ़े लिखो से बेहतर हैं...

 🖊 अनपढ़ कुछ पढ़े लिखो से बेहतर हैं....                        by - Aashu Chandra 🖊  याद करता हुं कि कुछ लोग थे मेरे आस पास जो मेरे कपड़ो का मजाक उड़ाय़ा करते थे.... मै आया था दूर गांव से शहर पढ़ने के लिए, वो मुझे देशी गवार बताया करते थे...  मै चुप चाप निकलता था दूर से, कही देख लिया तो सबके सामने नीचा दिखाया करते थे... मै भी शौक रहीशी के पाल तो लेता, पर पापा बहुत मेहनत से और थोड़ा कम पैसे कमाया करते थे... हम नही खरीद पाये बड़े बड़े खिलोने, हम थोड़े थोड़े पैसे अपनी जरूरतो पर जूटाय़ा करते थे.... हम आते थे जब घर से दूर तो हंसी भुल जाते थे, क्युकी हम हमेशा साथ बैठ के खाना खाय़ा करते थे.... ये अंजान शहर, ये किराये का कमरा, बचपन मे हम कितना मुस्कुराया करते थे.. उमर जैसे जैसे निकल रही है, महसूस हो रहा है, वो स्कूल का बस्ता नही, सपने पीठ पर ले जाया करते थे... आज जब ये शहर एक उम्मीद ले के आये तो पता चला, इंसान कितना खाली है,  वो गांव के ही सही पर पहले के लोग तो हमे...

A journey from English School, Hostel and Old Age Home

🖊  अंग्रेजी स्कूल, होस्टेल और वृद्धा  आश्रम            - by Aashu Chandra  🖊  ये  बचपन  से बच्चे  को अलग  रखना, उसे होस्टेल  मे रख  के पढाना.. उसका  छुट्टी मे घर आना मेहमानो  की तरह, उसमे भी उसका अपनी  मर्जी  चलाना ... उसकी  गलतियों  पर पर्दा  डाल  कर उसे शुरू  से ही गलत  करने  के लिये  आगे  बढाना... उसे  कीमती  चीजो का शौक  दे के, संस्कार  और समाज  से दूर ले जाना... बेटा  हो य़ा  बेटी, गलती करने  पर  भी  गलत  को गलत ना बताना  .... तुम्हारा  सिर्फ  उसे पैसे  भेजते  रहना, माँ  बाप  हो कर, मेहमानो  की तरह उसके पास आना जाना.... ये  बच्चे  के अंदर  अलगाव, कही ना कही बचपन से  सिखायी  गयी   गलतियों  मे  गलतियां आपकी  भी  है, माँ बाप, श्रिद्धा  आत्म सम्मान, परिवार, रिश्ते और समझ इन  सबसे उसे द...